Monday, April 24, 2017

लां की शाखाएं

लॉ में हैं अनेक शाखाएं
           लॉ के अंतर्गत आने वाले कोर्स का स्ट्रक्चर काफी फैला हुआ है। इसमें कई विषयों को शामिल किया जाता है। एक वकील अथवा जज को कई विषयों का ज्ञान रखना पड़ता है। अपनी विशेषज्ञता के हिसाब से वे अपनी फील्ड भी चुनते हैं।
          इसके सब्जेक्ट को लेकर रोचकता इसीलिए बनी रहती है, क्योंकि इसमें हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस, इकोनॉमिक्स तथा एनवायरमेंट जैसे विषयों में से किसी एक का चयन करना पड़ता है।

कुछ शाखाएं इस प्रकार हैं-
1-कॉरपोरेट लॉ-
          वर्तमान समय में वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए कॉरपोरेट लॉ की उपयोगिता बढ़ गई है। इसके तहत कॉरपोरेट जगत में होने वाले अपराधों के लिए उपाय या कानून बताए गए हैं। कॉरपोरेट कानूनों के बन जाने से कॉरपोरेट जगत में होने वाले अपराधों को रोकने तथा कॉन्ट्रेक्ट नेगोसिएशन, फाइनेंस प्रोजेक्ट, टैक्स लाइसेंस और ज्वॉइंट स्टॉक से संबंधित काम किए जाते हैं। इसमें वकील किसी फर्म से जुड़ कर उसे कॉरपोरेट विधि के बारे में सलाह देते हैं। पेटेंट अटॉर्नी- पेटेंट अटॉर्नी, पेटेंट लॉ का काफी प्रचलित शब्द है। इसका मतलब है कि एक ऐसा अधिकार, जिसके तहत कोई व्यक्ति अपना पूर्ण स्वामित्व रखता है। बिना उसकी मर्जी या सहमति के कोई अन्य व्यक्ति उस अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकता। यदि वह अधिकार किसी दूसरे व्यक्ति को स्थानांतरित (आंशिक या पूर्ण रूप से) करता है तो इसके बदले उस फर्म या व्यक्ति से कॉन्टेक्ट करता है।

2-साइबर लॉ-
         हर क्षेत्र में कंप्यूटर के बढ़ते उपयोग से साइबर क्राइम का भी ग्राफ बढ़ा है। आज इस कानून का विस्तार आम आदमी के साथ-साथ लॉ फर्म, बैंकिंग, रक्षा आदि कई क्षेत्रों में हो रहा है। इस कानून के तहत साइबर क्राइम के मुद्दों और उस पर कैसे लगाम लगाई जा सकती है, इसकी जानकारी दी जाती है।

3-क्रिमिनल लॉ-
         इसे लॉ की दुनिया का सबसे प्रचलित कानून माना जाता है। इस कानून से हर छात्र का सामना पड़ता है। हालांकि इसमें भी शुरुआती चरण में कई तरह की दिक्कतों से दो-चार होना पड़ता है, परन्तु एक बार नाम हो जाने पर फिर सरपट दौड़ शुरू हो जाती है।

4-फैमिली लॉ-
          यह क्षेत्र महिलाओं का पसंदीदा क्षेत्र है। इसके अंतर्गत पर्सनल लॉ, शादी, तलाक, गोद लेने, गाजिर्यनशिप एवं अन्य सभी पारिवारिक मामलों को शामिल किया जा सकता है। लगभग सभी जिलों में फैमिली कोर्ट की स्थापना की जाती है, ताकि पारिवारिक मामलों को उसी स्तर तक सुलझाया जा सके।

5-बैंकिंग लॉ-
           जिस तरह से देश की विकास दर में वृद्धि हो रही है, ठीक वैसे ही बैंकिंग क्षेत्र का दायरा भी बढ़ रहा है। इसमें खासतौर पर लोन, लोन रिकवरी, बैंकिंग एक्सपर्ट आदि से संबंधित कार्यो का निपटारा होता है।

6-टैक्स लॉ-
         इस शाखा के अंतर्गत सभी प्रकार के टैक्स जैसे इनकम टैक्स, सर्विस टैक्स, सेल टैक्स से जुड़े मामलों को वकीलों की सहायता से निपटाया जाता है।

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